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कानपुर विश्वविद्यालय में कुलपति और कर्मचारियों में जमकर हुआ विवाद कई मुद्दों पर कर्मचारियों ने की मांग जमकर हुई जिंदाबाद मुर्दाबाद की नारेबाजी

विपिन सागर (मुख्य संपादक)

कानपुर- छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में, बृहस्पतिवार को जमकर हंगामा हुआ। हंगामे का कारण कोई और नहीं बल्कि विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी स्वयं थे। विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों ने एकत्रित होकर कुलपति की तानाशाही के विरोध में जमकर मुर्दाबाद, जिंदाबाद के नारे लगाए विश्वविद्यालय कर्मचारियों का कहना है। कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक द्वारा विश्वविद्यालय की नीतियों के विपरीत हटकर विश्वविद्यालय में कार्य कराए जा रहे हैं। जिसको लेकर कर्मचारी विरोध में उतर गए। हालांकि इस पूरे मामले में  विश्वविद्यालय कर्मचारी व कुलपति के बीच लगभग 4 घंटा वार्तालाप चला लेकिन कोई हल निकल नहीं पाया।

क्या रहा विवाद का मुख्य कारण

विवाद का कारण विश्वविद्यालय में दिन प्रतिदिन नई रणनीति और नए आदेशों का था। जिसमें कर्मचारियों का कहना है, विश्वविद्यालय के तानाशाह कुलपति द्वारा कार्य के नाम पर शोषण किया जा रहा है। और वही चाहते कर्मचारियों को अच्छे पद पर बैठाकर मलाई खिलाई जा रही है।



ऐसा ही एक आदेश बुधवार को किया गया रेगुलर शिक्षक डॉ अजय यादव को छात्र शिकायत प्रकोष्ठ का इंचार्ज बना दिया गया। जिसके बाद सरकारी कर्मचारियों का गुस्सा और सातवें आसमान पर हो गया। कर्मचारियों का गुस्सा भी लाजमी हैं। नए शिक्षक कर्मचारी को इतना बड़ा पद दे दिया गया। हालांकि डॉ अजय यादव पूर्व में भी चर्चाओं में रहे हैं। जिसके बाद आज फिर माहौल गरमा गया
सूत्रों की माने तो विश्वविद्यालय में इन मामलों पर भी हो सकता है बड़ा विवाद

1- विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग के कुछ कर्मचारियों की सैलरी 40,000 से 60000 तक की है जिसका विरोध नियमित कर्मचारियों ने किया है।

2 - आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को रहने की सुविधा सरकारी क्वार्टर दिए गए हैं। जो कि महज 500 रुपये प्रतिमाह है। जबकि रेगुलर कर्मचारियों को अनुमानित 3000 देना होता है।

3 नई सुरक्षा कंपनियों द्वारा बार-बार कर्मचारियों को रोक कर प्रताड़ित करने एवं परिचय पत्र देखने के लिए मजबूर करना जिसका विरोध भी लगातार चल रहा था।

4 डॉ अजय यादव की बार-बार मलाई दार जगह पोस्टिंग करना

5 -  रेगुलर कर्मचारियों को प्राइवेट कर्मचारियों के अधीन कार्य करने के मामले में भी माहौल गरमाया हुआ है।


वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक का कहना है। कि विश्वविद्यालय में बायोमेट्रिक मशीनें लगाई जा रही हैं। जिसको लेकर के विश्वविद्यालय के कर्मचारी विरोध में है।

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