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कानपुर विश्वविद्यालय का एक और तानाशाही आदेश संविदा शिक्षकों के अधीन काम करेंगे आयोग से आए हुए शिक्षक। आयोग पर उठा सवाल कहीं ऐसा तो नहीं बिना काबिलियत वाले शिक्षकों को कर लिया हो सिस्टम से आयोग ने नियुक्त, उनसे ज्यादा काबिलियत हाल ही में भर्ती हुए csjmu में संविदा शिक्षकों में तो नहीं


विपिन सागर (मुख्य संपादक)

कानपुर विश्वविद्यालय में एक और तानाशाही आदेश जारी हुआ है। जिसमे पहली बार संविदा पर तैनात शिक्षकों के अधीन काम करेंगे आयोग से आए हुए शिक्षक। बता दें आपको हाल ही में कानपुर विश्वविद्यालय में तैनात हुए संविदा शिक्षकों को विधि पाठ्यक्रम की प्रायोगिक परीक्षा में डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर बनाया गया है,
 उन्हीं के निर्देशन में शहर के एडिट कॉलेजों में आयोग से नियुक्त हुए शिक्षक कार्य करेंगे। जो कि नियमो के विपरीत है। वही स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की बात करें तो उनके शिक्षकों को भी 6 मई 2009 के शासनादेश के अनुसार बराबर का मौका देना चाहिए।

 लेकिन इन सभी नियमो को ताक पर रखते हुए कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक और परीक्षा नियंत्रक डॉ ए के मिश्र ने एक नया तानाशाही फरमान जारी कर दिया। जबकि ऐसे कई मामलों में आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति की शिकायत परीक्षा नियंत्रक ने स्वयं की थी लेकिन कानपुर आते ही इस तरह के आदेश को जारी कर दिया। जिससे कहीं ना कहीं आयोग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कि कहीं ऐसा तो नहीं आयोग के द्वारा भेजे गए शिक्षक नाकामयाब हो। और कानपुर विश्वविद्यालय में हाल ही में तैनात हुए संविदा शिक्षकों में ज्यादा काबिलियत हो । ऐसे में कहीं ना कहीं लगातार विश्वविद्यालय के प्रति आयोग से आए शिक्षकों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। या फिर किसी अपने विशेष को फायदा देने के लिए इस तरह का फरमान जारी किया गया है।



द हिंदी न्यूज़ जल्द करेगा बड़ा खुलासा 

* मुकद्दमा के समझौता पर किसको मिली विश्वविद्यालय में मलाई। 

* साथ ही किस पूर्व कुलपति के बेटे को पहनाया विश्वविद्यालय ने कुर्शी का ताज। 

* कैसे खेला गया भर्तियों में आरक्षण का खेल। 
कितने कर्मचारी पहुंचे कोर्ट। 

* कितने मिकद्दमे में हुआ कोर्ट ऑफ कंटेंट। 

*क्यों एक के बाद एक दलितों को हटाया जा रहा है विश्वविद्यालय से। 

* कुर्सी पर उंगली ना उठे इसलिए किस-किस दलित को चिपकाया अपने पास 

* कैसे मिली प्रशासनिक अधिकारी को अचानक यह कुर्सी

*कैसे रखा जाता है कोर्ट के आदेशों को ताक पर

*लगभग 82 पदों पर हुई भर्तियों पर कितने अपनों को मिला लाभ जिनके लिखित में सबसे ज्यादा नंबर उनको दिखाया बाहर का रास्ता

* किस पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल की बेटी को भी मिली तैनाती

* प्राइवेट कर्मचारियों को दी जा रही है कितनी सैलरी

* अन्य विश्वविद्यालय से आये कर्मचारी किस तरह से काट रहे हैं मलाई

* सबूतों के साथ होगी हर खबर पर नजर

जुड़े रहे हमारे साथ हम दिखाएंगे विश्वविद्यालय की हकीकत


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